जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा- कविता(प्रतीप अलंकार पर आधारित )
शीर्षक --एक नई कल्पना
व्याख्या ---कवि के द्वारा एक नई कल्पना की गई है और उसके सामने जिससे तुलना किया गया है कल्पना को ही श्रेष्ठ बताया गया है ।
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एक नई कल्पना
उसकी गति पवन क्या पाये ।
उसके सामने शीश झुकाये ।
हिमालय से बढ़कर बातें ।
सुन हिमालय भी चकराये ।
सागर में जितनी गंभीरता ।
उसकी रती भर भी नहीं ।
बाहों में जो बल भरे हैं ।
इन्द्र में भी नजर न आये ।
चांद की सुंदरता भूल जाओ ।
सौ सौ चांद उस पर कुरबान ।
कोयल की गीत क्या मीठी ।
कानों में वो शहद बरसाये ।
पांव इतने उनके कोमल ।
फूल भी मानो पत्थर लगते ।
मेघों में क्या कालापन ।
नैनों में जो काजल सुहाये ।
माथे पर जो चमकते बिन्दी ।
सूरज की वह याद दिलाते ।
यादों तक रहे सूरज सीमित ।
बिन्दी के आगे अंधेरा छाये ।
है यह एक नई कल्पना ।
उसके आगे कल्पना अधूरा ।
कल्पना जितना भी करलो ।
कल्पना से पीछे रह जाये ।
गिरधारी लाल चौहान
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