Monday, August 24, 2020

जांजगीर-चांपा से गिरधारी लाल चौहान की रचना- नई कल्पना

नाम----गिरधारी लाल चौहान
जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा- कविता(प्रतीप अलंकार पर आधारित )
शीर्षक --एक नई कल्पना
व्याख्या ---कवि के द्वारा एक नई कल्पना की गई है और उसके सामने  जिससे तुलना किया गया है कल्पना को ही श्रेष्ठ बताया गया है ।
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             एक नई कल्पना

उसकी गति पवन क्या पाये ।
उसके सामने शीश झुकाये ।
हिमालय से बढ़कर बातें ।
सुन हिमालय भी चकराये ।

सागर में जितनी गंभीरता ।
उसकी रती भर भी नहीं ।
बाहों में जो  बल भरे हैं ।
 इन्द्र में भी नजर न आये ।

चांद की सुंदरता भूल जाओ ।
सौ  सौ चांद उस पर कुरबान ।
कोयल की गीत क्या मीठी ।
कानों में वो शहद बरसाये ।

पांव इतने उनके कोमल ।
फूल भी  मानो पत्थर लगते ।
मेघों में क्या  कालापन ।
नैनों में जो काजल सुहाये ।

माथे पर जो चमकते बिन्दी ।
सूरज की वह याद दिलाते ।
यादों तक रहे सूरज सीमित ।
बिन्दी के आगे अंधेरा छाये ।

है यह एक नई कल्पना ।
उसके आगे कल्पना अधूरा ।
कल्पना जितना भी करलो ।
कल्पना से पीछे रह जाये ।

गिरधारी लाल चौहान

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