जिला-महासमुन्द, छत्तीसगढ़
शीर्षक;"ग्रामोदय"
विधा-कविता(तुकांत)
अलंकार-वीप्सा अलंकार
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देश की आत्मा बसती गाँव में,
मेहनत का मशाल जलता यहाँ।
घर-घर अनाज की कोठियों में,
भर-भर अन्न सदा रहता है यहाँ।।
सुविधाओं का हो विस्तार अगर,
कृषक अधिक अन्न उपजायेगा।
उन्नति अपनी चरम पर पहूँचेगी,
गाँव-गाँव धन्य-धन्य हो जायेगा।।
शिक्षा स्वास्थ्य और स्वच्छ पानी,
जरूरी है यहाँ संसाधन का होना।
नई-नई तकनीकों को अपनाने से,
महकेगा गाँव का हर कोना-कोना।।
अच्छी सेहत के लिए हो अस्पताल,
विद्यालय महाविद्यालय खोले जाएँ।
दूर-दूर तक पढ़ने भटकते हैं बच्चे,
पढ़कर खूब लगन ऊँचा स्तर पाएँ।।
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वीप्सा अलंकार-घर-घर,भर-भर,
गाँव-गाँव,धन्य-धन्य, नई-नई, कोना-कोना,
दूर-दूर।
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