संबलपुर,जिला-कांकेर
विषय :- *ग्रामोदय के लिए प्रयास*
विधा :- विप्सा अलंकार का प्रयोग
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~ &% *ग्रामोदय* %& ~
छोटा सा गाँव
मेरा प्यारा सा गाँव,
लगती बड़ी भली
पीपल का छाँव।
शहर के चकाचौंध से
मतलब नहीं है रखना ,
गाँव को स्वर्ग
समान है गढ़ना।
जन-जन के आँखों में
स्वप्निल सपन है भरना,
जीवन के पल-पल को
है सुरभित करना।
भाग-दौड़ भरी दुनियाँ में
शहरों में रहते अनजान
गाँव रह करते
एक दूसरे का सम्मान।
गाँव के विकास के लिए
करना है काम,
सभ्यता संस्कृति और विकास
का बनाना है सुंदर धाम।
अत्याचार,अनाचार, और
आडंबर को स्थान नहीं,
प्रेम,भाईचारा, सौहार्द,और
संस्कारों का खान यहीं।
मिलजुल कर साथ रहेंगे
आत्म निर्भरता का मंत्र पढ़ेंगे,
सरकारी हर योजनाओं से
गाँव का नव निर्माण करेंगे।
*विप्सा अलंकार का प्रयोग* :--
जन-जन और पल-पल में
विप्सा अलंकार का प्रयोग है।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर,( छ.ग.)
Very nice🙏🏻👍🏻
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