Saturday, August 1, 2020

जांजगीर-चांपा से गिरधारी लाल चौहान की रचना- लक्ष्य

नाम----गिरधारी लाल चौहान
जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---कविता(विभावना अलंकार  पर आधारित)
शीर्षक --- लक्ष्य ही लक्ष्य

व्याख्या ---कवि के द्वारा लक्ष्य  को लक्षित करते हुए अपनी कल्पनाओं को यथार्थ के धरातल में पाने की चेष्टा का वर्णन किया गया है ।
************************************************

लक्ष्य ही लक्ष्य

अर्जुन की तरह  लक्ष्य न मेरा।
न पेड़ पर किसी तरह की पक्षी ।
नहीं आंख का अचूक निशाना ।
फिर भी पक्षी जमीन पर गिर पड़ा ।

लक्ष्य मेरा धन कमाने की
फूटी कौड़ी भी कमाया नहीं ।
धन ही धन मेरे पास लगे
इस राह को आजमाया नहीं ।

लक्ष्य है मेरा कविता लिखूं।
गिनीज बुक में नाम लिखाऊं ।
एक भी कविता लिखा नहीं ।
पुरुस्कार की चर्चा सुनाऊं ।

उपन्यास का लक्ष्य मेरा ।
जबसे प्रेमचंद को जाना ।
शीर्षक खोज रखा हूं सबका ।
कहीं बैठे एक ही ठिकाना ।

लक्ष्य लेकर भटक रहा है मैं
मन के आस-पास
कोई कहता पूरा हो जाएगा
कोई कर देता निराश ।

न सुर  न सुर के श्याम 
न राधिका की अटारी ।
फिर भी बांसुरी बजाते बैठे 
वहां मोहन गिरधारी ।

न नायक न नायिका फिर भी 
विरह  और मिलन ।
कविता लिखते आज के कवि 
न कागज न कलम ।

अनसुनी कहानी 
पल पल बसे मन ।
छलक रहे आंसू  नयन
पता व्यक्ति का न जीवन ।

गिरधारी लाल चौहान

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...