Friday, August 7, 2020

जांजगीर-चाम्पा, छत्तीसगढ़ से कवि-रंजना मखीजा जी की कविता-मेरी माँ

कवि रंजना मखीजा
स्थान अकलतरा जांजगीर चांपा
विषय मेरी माँ

मुझे समर्पित है जिसका जीवन
ए मेरी माता तुम्हे नमन है
मैं तेरी छोटी सी एक चंदा
तू ही तो मेरा नील गगन है।

   मुझे समर्पित है जिसका जीवन...
          
नहीं फिकर है,तुझे क्यूं अपनी
   मेरी फिकर में तू घुल रही है
   मेरे दुखों से क्यूं रो रही है
 मेरी खुशी से क्यूं खिल रही है।
 तुझे जो पाया तो रब को पाया
ना कुछ मिले तो शिकन नहीं है।

मुझे समर्पित है.....
   

    दुखों की तपती सी धूप में मां
   तू ठंडी छाव की इक छूअनहै
    तू खुद है जागे मुझे सुलाए
    मेरी ही सोचों में तू मगन है
     मेरी ये सांसे मेरी नहीं है
     यहां पे तेरी ही धड़कन है।
मुझे समर्पित है जिसका....


        कभी उदासी ने मुझको घेरा
       बनी तू आशा की इक किरण है
ना तोड़ पाए कभी जमाना
मेरा तुम्हारा वो बंधन है
      की तेरे आंचल की छांव में मां
     मिटी मेरी चिंता और थकन है।
    मुझे समर्पित है जिसका जीवन....
रंजना मखीजा
अकलतरा

8 comments:

  1. Beautiful poem Bhabhi... 👏👏👏

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  2. Bahut sunder maa wo hai jiska karj to iswer bhi nahi utar sakta

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  3. Maa to ishwar hoti hai

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  4. बहुत ही बढ़िया मां पे जितना भी लिखे कम है । अच्छी लेखनी

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  5. बहुत सुंदर मार्मिक कविता

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