कवि रंजना मखीजा
स्थान अकलतरा जांजगीर चांपा
विषय मेरी माँ
मुझे समर्पित है जिसका जीवन
ए मेरी माता तुम्हे नमन है
मैं तेरी छोटी सी एक चंदा
तू ही तो मेरा नील गगन है।
मुझे समर्पित है जिसका जीवन...
नहीं फिकर है,तुझे क्यूं अपनी
मेरी फिकर में तू घुल रही है
मेरे दुखों से क्यूं रो रही है
मेरी खुशी से क्यूं खिल रही है।
तुझे जो पाया तो रब को पाया
ना कुछ मिले तो शिकन नहीं है।
मुझे समर्पित है.....
दुखों की तपती सी धूप में मां
तू ठंडी छाव की इक छूअनहै
तू खुद है जागे मुझे सुलाए
मेरी ही सोचों में तू मगन है
मेरी ये सांसे मेरी नहीं है
यहां पे तेरी ही धड़कन है।
मुझे समर्पित है जिसका....
कभी उदासी ने मुझको घेरा
बनी तू आशा की इक किरण है
ना तोड़ पाए कभी जमाना
मेरा तुम्हारा वो बंधन है
की तेरे आंचल की छांव में मां
मिटी मेरी चिंता और थकन है।
मुझे समर्पित है जिसका जीवन....
रंजना मखीजा
Beautiful poem Bhabhi... 👏👏👏
ReplyDeleteBahut sunder maa wo hai jiska karj to iswer bhi nahi utar sakta
ReplyDeleteMaa to ishwar hoti hai
ReplyDeleteबहुत ही बढ़िया मां पे जितना भी लिखे कम है । अच्छी लेखनी
ReplyDeleteबहुत सुंदर मार्मिक कविता
ReplyDeleteBahut sundar
ReplyDeleteExcellent emotions
ReplyDeleteBahut sunder kavita 👏👏🙏
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