Friday, August 7, 2020

मैसूर,कर्नाटक से कवयित्री डॉ बी निर्मला जी की कविता- किसान

कवयित्री: डॉ बी निर्मला, 'राजी '
जिला: मैसूर,
राज्य: कर्नाटक,
शीर्षक: किसान
        
              किसान
 
मैं हूं, सीधा सादा किसान,
कहते लोग मैं भारत की शान,
हल,बैल मेरे जीवन साथी,
बीज,खाद से करूं मैं खेती।
फसल,खेती से अन्न उगाता,
कहते लोग मुझे अन्नदाता,
रहे माथे पर पसीना, शिकन,
कठोर मेहनत ही मेरा जीवन।
सर्दी,गर्मी,वर्षा सें मैं न डरता,
काम से कभी न जी चुराता,
ग़रीबी,मजबूरी से मैं लाचार,
हूं,सहता भूख,प्यास की मार।
सूखा,बाढ़,अतिवृष्टि,अनावृष्टि
सबका अनुभव मैंने है किया,
जो भी मिला जीवन में मुझे,
उसी में जीना सीख लिया।
धोखा,लालच कभी ना करूं,
जो मिले,उसी में गुजारा करूं,
माटी की सुगन्ध मुझे हैभाती,
हरी भरी खेती,अच्छी लगती।
अपना व सबका पेट भरूं मैं,
माटी से भी सोना उगाऊं मैं,
मुझसे ही देश की है पहचान,
हां,मैं हूं सीधा सादा किसान,

डॉ.बी.निर्मला,
एसोसिएटे प्रोफेसर,(रि.)
मैसूर,कर्नाटक,
स्वरचित एवं सर्वाधिकार सुरक्षित।

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