Monday, August 31, 2020

दुर्ग से अनुरमा शुक्ला की रचना- जीवन का अंदाज

नाम- अनुरमा शुक्ला
स्थान- दुर्ग (छ.ग.)
विधि- मुक्त
शीर्षक- *जीने का अंदाज*

जीवन का हर पड़ाव
नया अनुभव दे जाती है,
सुख-दुख का आना-जाना
समझ का ऐसा ताना-बाना।

कुछ लोग संघर्षों में भी मुस्कुराते हैं,
 तो कोई सुख में भी जी जलाते हैं,
सहज बना रहे सदा व्यवहार,
चाहे कठिनाई आये अपार ।

कभी धूप,कभी छांव है मिलती,
पर उम्र कभी ना थमती है,
लक्ष्य बनाकर चलते रहने से,
राही को मंजिल मिल जाती है।

लोग अलग हैं, सोच अलग,
जीवन के हर पड़ाव का अनुभव लेते सब अलग-अलग,  क्योंकि
हर किसी के जीने का अंदाज अलग।।


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उल्लेख अलंकार- जीवन के प्रति सबका नजरिया भिन्न-भिन्न होता है।

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