विषय - जन्माष्टमी
विषय क्षेत्र - मुक्त
विधा - छंद मक्त कविता
अलंकार - उपमा अलंकार
शीर्षक - कृष्ण भक्ति
तरस गई अखियाँ मनमोहन ,
अब तो दरस दिखा दो ।
ग्वाल-बाल संग धेनु चरावत,
मुरली मधुर सुना दो ।
वृन्दावन की कुंज गलिन मे,
यमुना-तट रास रचा दो ।
गोपी के घर माखन मिश्री ,
खाओ खूब खिला दो ।।1।।
कमल नयन प्रभु सुन्दर तेरो ,
मुझको बहुत ही भायो ।
मेघ श्याम से सांवरे कान्हा ,
मन्द-मन्द मुस्कायो ।
कटि करधन पग पैजनिया ,
ठुमकि-ठुमकि प्रभु धायो ।
देखत मन मे हरि की झाँकी,
पद पंकज सिर नायो ।।2।।
मोर मुकुट पीताम्बरधारी ,
फिर से भारत मे आओ ।
कृष्ण कन्हैया बांके बिहारी ,
आनंद - रस बरसाओ ।
गोविन्द गोवर्धन गिरिधारी ,
सबकी लाज बचाओ ।
प्रीत की रीति सिखा कर ,
भक्त जनों को पार लगाओ।।3।।
अवतरण दिवस जन्माष्टमी,
करते हैं पूजा वंदन ।
दुष्टों का संहार करो ,
पुनः चलाओ चक्र सुदर्शन।
कलि के इस महाभारत में,
करा दो गीताज्ञान श्रवण ।
सबके तारणहार प्रभुजी ,
अर्पित सर्वस्व तन मन धन।।4।।
कोरोना का ग्रहण लगा है,
आज विश्व को भगवन ।
झूठ कपट अन्याय उपद्रव,
विश्वयुद्ध का भय हर क्षण।
मठ मंदिर उत्सव इस बार,
जन्माष्टमी को सूनापन ।
हे जगदीश्वर जल्दी आओ,
उद्धार करो जग के जन-जन।।5।।
रचनाकार
लीलाधर कुम्हार
बलौदा बाजार/छत्तीसगढ़
Bahut hi behatreen sir ji
ReplyDeletehindi kahani - लड्डू गोपाल जी का प्रत्यक्ष अनुभव | https://kandultech.blogspot.com/2020/06/hindi-kahani-laddu-gopal.html
ReplyDeleteWow राधे-राधे
https://kandultech.blogspot.com/?m=1
Achchha laga maza aa gaya....
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