स्थान-----नवापाराखुर्द/सक्ती
जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---कविता(यमक अलंकार पर आधारित)
शीर्षक --- मन के मोती
व्याख्या ---कवि के द्वारा मन के मोती शीर्षक में अलग-अलग बातों का वर्णन किया गया है ये विचार मन में विकसित होते हैं इसलिए शीर्षक मन के मोती रखा गया है ।
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मन के मोती
सकल देखकर सकल हंसे,समय समय की बात ।
सकल सिद्धी के लिए मन ,भटक रहा दिन रात ।
चाल तुम्हारा ठीक नहीं,तभी इतना लग रहा देर ।
चाल जहां पर ठीक नहीं, वहां उंगली उठती ढ़ेर ।
का गज छोड़ चला गया वह,अब नहीं आयेगा ।
कागज में जो लिखा क्या, उसे तू पढ़ पायेगा ।
जो कलम किया था, तुम्हारे पास आया कहां से ।
ये जो कलम है कल ही , खरीदा हूं मैं वहां से ।
धन के मामले में वह ,सचमुच ही लखपति है ।
लेकिन पत्नि के मामले ,में वह लखपति नहीं है ।
गिरधारी लाल चौहान
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