Tuesday, August 4, 2020

जांजगीर-चांपा से गिरधारी लाल चौहान की रचना- गुमराह

नाम----गिरधारी लाल चौहान
स्थान-----नवापाराखुर्द/सक्ती
जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ

विधा---कविता(यमक अलंकार  पर आधारित)
शीर्षक --- मन के मोती
व्याख्या ---कवि के द्वारा  मन के मोती शीर्षक में  अलग-अलग बातों का वर्णन किया गया है ये विचार मन में विकसित होते हैं इसलिए शीर्षक मन के मोती रखा गया है ।

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              मन के मोती

सकल देखकर सकल हंसे,समय समय की बात ।
सकल सिद्धी के लिए मन ,भटक रहा दिन रात ।

चाल तुम्हारा ठीक नहीं,तभी इतना लग रहा देर ।
चाल जहां पर ठीक नहीं, वहां उंगली उठती ढ़ेर ।

का गज छोड़ चला गया वह,अब नहीं आयेगा ।
कागज में जो लिखा क्या,  उसे तू पढ़ पायेगा ।

जो कलम किया था, तुम्हारे पास आया कहां से ।
ये जो कलम है कल ही ,  खरीदा हूं  मैं वहां से ।

धन के मामले में वह ,सचमुच ही लखपति है ।
लेकिन पत्नि के मामले ,में वह लखपति नहीं है ।

गिरधारी लाल चौहान

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