संबलपुर, जिला -कांकेर
विषय-गुमराह
~~~~~~~~~~~~
गुमराह
गुमराह हो रहे
मेरे देश के नौनिहाल,
शराब,सिगरेट ने बिगाड़ा
युवाओं का हाल।
ड्रग्स,पब,मदिरालय
ने किया बेहाल,
सजना है सजना के लिए,
प्रीत करे सवाल।
ऊँचे-ऊँचे ख्वाबों से
देते रहे खुद को दिलासा,
कनक नगरी में रह
कनक पान कर
भरे मन में झूठी आशा।
जिंदगी हार बैठे नशे में समझ
लिए यही जीवन की परिभाषा।
चेहरे पर नकाब लगा
समझाते रहे जीवन की भाषा।
जिंदगी से बढ़कर बेपनाह
मुहब्बत नशा से हमने किया,
बदले में उम्रभर मदिरालय ने
हमें शर्मसार किया।
मनाते रहे ता उम्र
जश्न हम महफिलों में,
हर लम्हा बर्बाद कर
जिंदगी श्मशान कर बैठे।
*व्याख्या*- प्रस्तुत कविता में देश का युवा वर्ग नशीले पदार्थों का सेवन कर गुमराह हो रहे है।अपनी जिंदगी को बर्बाद कर रहे है।सबके सामने शर्मसार किया।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)
No comments:
Post a Comment