स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
शीर्षक -"नटखट कान्हा"(उपमा अलंकार)
विधा- छंदमुक्त कविता
*******************
नटखट कान्हा आयो रे
मुख माखन लगाओ रे
श्याम से गोरो हो गयो
ग्वालन को जलायो रे ।
मुख माटी खायो रे
धरा को समायो रे
भाव ऐसो दिखाए के
यशोदा मा को डरायो रे।
पद पाझेब बजायो ऐसो
छम छम सावन लाग्यो रे
दौड़ के ऐसे भाग्यो
नंद बाबा को सतायो रे।
गइया चरावन जायो रे
मुख मुरली बजायो रे
मुख गुलाब की पंखडियाँ
चन्द्र रवि सा नयन लाग्यो रे।
व्याख्या-:( कृष्ण के नटखट बाल रूप का वर्णन है
बुन्देल खंडी में एवं मुख गुलाब की पंखड़ी ,चंद्र रवि से नयन में उपमा अलंकार है)
No comments:
Post a Comment