रचनाकार श्रीमती रजनी शर्मा
जिला रायपुर छत्तीसगढ़
विधा मुक्त छंद
शीर्षक कृष्णा सलोना
कृष्णा सलोना
यह सारा हरा सोना तुम्हारा,
यह जंगल तुम्हारा बिछौना।
तरक्की के आईने दिखा कर,
रिझायेंगे बजाकर खूब झुनझुना।
बालाओं के गोश्त की नुमाइश,
ईश्तहार तो फ़कत है इक बहाना।
पेड़,हांडी ,चापड़ा यूं ही रहने दो।
सल्फी को रोको रैपरों में बेचना।
सांस धड़क है मुझ आदिवासी में,
फिर जारी क्यों दीवार में सजाना।
हरित द्रोपती उठो और लड़ो इन,
चीर हरण आसक्त दु:शासनों से।
क्योंकि अवतरित ना होगा यहां,
सदियों तक कोई'कृष्णा सलोना'।
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