जिला बेमेतरा छत्तीसगढ़
विधा कविता
मातृभूमि कर्मभूमि
मातृभूमि और कर्मभूमि,
दोनों स्वर्ग समान।
एक में हम लायक बने,
दूजे में फर्ज निभाए।
नहीं भुलाओ कभी दोनों को,
दोनों मात पिता समान।
मातृभूमि में खेले बढ़े हम,
कर्मभूमि डट जाए।
दोनों का तुम मान रखो,
दोनों देवी मां समान।
मातृभूमि के कर्ज को,
नहीं चुका सकता कोई मानव।
फिर भी जीते जी कभी भी,
मत बिसराना इनको।
कितनी भी व्यस्त हो जिंदगी,
मातृभूमि आते जाते रहना।
चाहे बड़े साहब बन जाओ,
इसको शीश नवाते रहना।
कर्मभूमि में अपना कर्म,
सदा ईमानदारी से निभाना।
कर्मभूमि ने जो अपनापन प्यार दिया है,
प्रयास चुकाने का करना।
कर्मभूमि में नाम करोगे तो,
मातृभूमि का ऊंचा शीश होगा।
मातृभूमि और कर्मभूमि,
दोनों को मत बिसराना।
दोनो स्वर्ग, देवी मां, मात पिता है,
इनका सम्मान सदा तुम करना......
बेहतरीन लेख 👌👌
ReplyDeleteबहुत सुन्दर लेख 👍👍👍
ReplyDelete