Wednesday, August 26, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- वसुधा

रचनाकार-नलिनी  बाजपेयी
 संबलपुर, जिला-कांकेर छ .ग.
  विषय   -वसुधा(रूपक अलंकार का प्रयोग)
    

            *वसुधा प्यारी*

हरी भरी वसुधा प्यारी 
      लागे हरीतिमा ओढ़े नारी,
कैसे गुण गाऊँ मानव जीवन
         पर करती उपकार भारी।

ऊँचे खड़े धरा पर देवदार
         ताक रहा मित्र आकाश,
लगे अपलक नभ नील नयन
       लगे विशाल भरे हो प्रकाश।

धरा भी होती माँ 
           समान हितकारी
   दुनियाँ का करती 
           कल्याण भारी।

खिले हजारों सरसिज
        धरा के नयन सागर में,
मन मोह लिया जग का
         हरियाली भरे गागर ने।

वसुधा करते है  
         तुम्हें नित नमन
बिन तुम्हारे प्रकृति का 
           नहीं होता वन्दन।

तुम्हारा यश वेद पुराणों
         संग मानव ने बखाना,
कल्याण होगा नहीं बिन
        तुम्हारे सबने है माना।

*रूपक अलंकार का प्रयोग*-

1.खिले हजारों सरसिज तुम्हारे नयन सागर में
2.हरियाली भरे गागर ने
3.अपलक नभ नील नयन विशाल लगे भरे हो प्रकाश।

   नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर (छ .ग.)

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