Friday, August 28, 2020

कांकेर से मीरा आर्ची चौहान की रचना- श्रम जीवी

रचयिता-मीरा आर्ची चौहान
जिला -कांकेर,छग
शीर्षक-श्रम जीवी
विधा-कविता (मुक्त छंद)
अलंकार-अपह्नुति अलंकार

मेहनत जो   
करता है,
दूसरों की 
पेट की ज्वाला
बुझाने को,
 वही आज
भूखा है दुःख
और पीड़ा के
साये में।

कपड़े जो बुनता है
दुनिया को ठिठुरन
से बचाने को।
वही आज कांप
रहा है ,
बुझते- सुलगते
राख के बीच।

मकान जो बनाता है
दुनिया का आशियाना
बचाने को,
उसी के सिर पर
छप्पर नहीं,
सिर कहां छुपायेगा
बेबसी तले।।

मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
_________________________
अपह्नुति अलंकार-
1-पेट की ज्वाला।
2-बुझते-सुलगते राख।
3- सिर पर छप्पर।
4-बेबसी तले।
--------------------------------------

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...