रायगढ़, छत्तीसगढ़
विषय- श्रम और सेवा पर आधारित (अपनहुति अलंकार)
विधा- छंद मुक्त
शीर्षक- श्रमयुक्त जीवन
श्रम पर आधारित जीवन
सुंदरता है स्वेद की बूंदे
मोती नही रक्त कणों से
सुसज्जित है श्रमिक का जीवन
स्वर्ण नही ये धान की बालियाँ हैं
खनक दानों की चूड़ियों में कहाँ हैं
अमराई की मंजरियों से ही तो
अलंकृत आज वसुधा है
थके,रुके और थमें बिना जो चले
आंसू,रक्त और स्वेद की परवाह जो ना करे
जीवन के इन राहों में अमृत उसे मिले
जो निज को जला धरा की सेवा करें
श्रम -साध्य जीवन ही जीवन है
सेवा में ही जीवन का बड़प्पन है
जो निज बाजुओं पे भरोसा करें
वही अपने जीवन को सार्थक करे।
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