जिला :- बलौदा बाजार
( छत्तीसगढ़ )
शीर्षक :- आत्मनिर्भर भारत
विधा :- छंदमुक्त कविता
अलंकार :- अनन्वय अलंकार
स्वदेशी का करो प्रचार ,
स्वदेशी अपनाना है ।
आत्मनिर्भर भारत हो ,
हम सबने यह ठाना है ।।
विदेशी तो विदेशी है ,
पैसा लूट ले जाती है ।
दिखलाकर भ्रामक विज्ञापन,
हमको मूर्ख बनाती है।।
ऐसे कम्पनी की वस्तुएँ ,
घर मे नहीं लाना है ।
आत्मनिर्भर भारत.....।।1।।
बाजारों मे चीनी सामानें ,
होते बहुत आकर्षक ।
सस्ते और टिकाऊ समझकर,
दौड़े आते ग्राहक ।।
लेकिन अब तो देश की खातिर,
बहिष्कार करना है ।
आत्मनिर्भर भारत......।।2।।
अपने गाँव शहर में निर्मित ,
' लोकल ' भी क्या कम है ।
देशी वस्तुएँ खाँटी देशी ,
मिलावट रहित बनावट है।।
फुटपाथी ठेले मे जाकर ,
चाट-पकौड़े खाना है ।
आत्मनिर्भर भारत.....।।3।।
शुद्ध स्वदेशी परम्पराएँ ,
खान-पान पोशाक ।
स्वदेशी से देश का ,
हर कोना आबाद ।।
स्वदेशी के कार्य मे ,
जन-जन को लगाना है।
आत्मनिर्भर भारत.....।।4।।
देश की आर्थिक मजबूती ,
स्वदेशी से आएगा ।
देश की भाषा संस्कृति ,
विकास की गंगा बहायेगा ।।
भारत केवल भारत है ,
भारत भव्य बनाना है ।
आत्मनिर्भर भारत......।।5।।
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