Saturday, August 8, 2020

बलौदाबाजार से लीलाधर कुम्हार की रचना- जीवन की दोपहर


लीलाधर कुम्हार
विषय:- जीवन का दोपहर
विषय क्षेत्र:- मुक्त
विधा:- छन्द मुक्त कविता
अलंकार:- श्लेष वक्रोक्ति अलंकार

शीर्षक :-  जीवन का दोपहर
              
सुबह का बचपन बीत गया ,
         खेल - कूद नादानी मे ।
जीवन का दोपहर आ गया ,
        यौवन की मस्तानी मे।।
जोश उमंग अपार है ,
           हृदय प्रेम-रस  धार।
कुछ करने-बनने की इच्छा,
            इच्छा अपरम्पार ।।
गरम खून चंचल मति ,
        विषय-वासना के फंदे ।
सफल उन्ही का जीवन जो, 
        संयम-सत्संग में सधे।।
ग्रीष्मकालीन दोपहरी ,
          दोपहर का जीवन ।
भूख प्यास गर्मी बढ़े ,
         ये तीनों तन - मन ।।
शाम का बुढ़ापा आये ,
      उसके पहले चेत करो ।
देश-धर्म की लाज बचाने ,
   प्रखर जवानी भेंट करो ।।
भारत माँ की सेवा मे ,
      सार्थक कर लो जिंदगी ।
मानव-जन्म सफल हो जाये,
        कर लो ऐसी बन्दगी ।।
  
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             रचनाकार
         लीलाधर कुम्हार

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