रचनाकार - शैलेन्द्र चेलक
पता - पेंडरवानी ,बालोद, छ. ग.
शीर्षक -कोरोना काल मे रक्षाबंधन
विधा - मुक्त छंद (कविता)
कोरोना काल में रक्षाबंधन
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भाई- बहन के रिश्तों का ,
एक अलग एहसास है ,
रक्षाबंधन का शुभ दिन ,
हर दिनों से खास है ,
क्या तोड़ पायेगा कोरोना ?
प्रेम के उस बंधन को ,
जो सात समंदर पार भी,
अपनों के दिल के पास है ,
जब राखी बंधी कलाई की,
भाई ने सपनें संजोये है ,
भाई से विलग हो बहना भी ,
फूट- फूट कर रोए है ,
कोरोना के संकट में ,
मायके न आने का गम सही ,
पर दिल के रिश्तें दूरी में भी,
कभी अलग क्या होए है ?
भाई की याद आए राखी में ,
भोजन की हर कौर में ,
रश्में निभा लो मोबाइल से ,
रहकर अपने ठौर में ,
प्रेम निभाना तो जीवनभर है,
जीवन बचे तो है राखी ,
बहन की राखी मास्क को समझो,
संक्रमण की इस दौर में ,
अपने -अपने घर में रहकर ,
राखी मनाना है इस बार ,
दिल से जुड़े जो रिश्ते होते,
उनमें होता है केवल प्यार ,
ए कठिन दौर निकल जायेगा,
बस इतना रखो एतबार ,
उल्लास दोगुना होगा फिर,
जब मिलेंगे अगली बार ,
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