Tuesday, August 4, 2020

बालोद छत्तीसगढ़ से कवि शैलेन्द्र चेलक जी की कविता- कोरोना काल में रक्षाबंधन

रचनाकार - शैलेन्द्र चेलक
पता - पेंडरवानी ,बालोद, छ. ग.
शीर्षक -कोरोना काल मे रक्षाबंधन
विधा - मुक्त छंद (कविता)

कोरोना काल में रक्षाबंधन 
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भाई- बहन के रिश्तों का ,
              एक अलग एहसास है ,
रक्षाबंधन का शुभ दिन ,
                 हर दिनों से खास है ,
क्या तोड़ पायेगा कोरोना ?
              प्रेम के उस बंधन को ,
जो सात समंदर पार भी,
          अपनों के दिल के पास है ,
जब राखी बंधी कलाई की,
             भाई ने सपनें संजोये है ,
भाई से विलग हो बहना भी ,
                फूट- फूट कर रोए है ,
कोरोना के संकट में ,
      मायके न आने का गम सही ,
पर दिल के रिश्तें दूरी में भी,
          कभी अलग क्या होए है ?
भाई की याद आए राखी में ,
              भोजन की हर कौर में ,
रश्में निभा लो मोबाइल से ,
                 रहकर अपने ठौर में ,
प्रेम निभाना तो जीवनभर है,
              जीवन बचे तो है राखी ,
बहन की राखी मास्क को समझो,
            संक्रमण की इस दौर में ,
अपने -अपने घर में रहकर ,
           राखी मनाना है इस बार ,
दिल से जुड़े जो रिश्ते होते,
          उनमें होता है केवल प्यार ,
ए कठिन दौर निकल जायेगा,
            बस इतना रखो एतबार ,
उल्लास दोगुना होगा फिर,
             जब मिलेंगे अगली बार ,
 
         - - शैलेन्द्र चेलक - -

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