Monday, August 3, 2020

मैसूर,कर्नाटक से कवयित्री डॉ बी निर्मला जी की कविता- एक कविता शहीदों के नाम

कवयित्री: डॉ बी निर्मला,
जिला: मैसूर,
राज्य: कर्नाटक,
शीर्षक: एक कविता शहीदों के नाम।


एक कविता,शहीदों के नाम,

एक कविता देश के वीर शहीदों के नाम,
देशवासियों,जरा सुन लो मेरा  यह पैगाम,

मिले समय कभी तो शहीदों  के घर आंगन जाकर देखना,
और उनके दिलों की धडकनों को जरा सा टटोलना,

शहीद कभी नहीं सोचता और
जीता कभी अपने लिए,
जिसका दिल धड़के सदा हरपल अपने वतन के लिए,

कहता है हर एक वीर शहीद, बड़े फक्र और शान से,
मेरा सारा जीवन जुड़ा है अपनी मां और मातृ भूमि से।

हे मां!सुन आया था तेरे पास, मैं एक मांस का छोटा सा, निराकार लोथड़ा बनकर,
तूने मुझे अपने अगाध प्रेम, ममता,त्याग से तराश,साकार पेश किया एक वीर बनाकर,

है मां! मैंने भी कसम खाई है  जीने मरने की,हर पल, 
मर जाऊंगा,मिट जाऊंगा पर, आंच न आने दूंगा तुझ पर।

दुश्मन के नापाक इरादों को कभी कामयाब,मरते दम तक नहीं होने दूंगा,
अपना लहू बहाकर,तेरा और अपनी मातृभूमि का ऋण चुकाऊंगा,

देख मां!आज मैंने दुश्मनों को युद्धभूमि में,कैसे पीछे खदेड़, पछाड़ दिया,
चुन चुन कर आज मैंने तेरे सारे अपमानों का बदला वीरता से ले लिया,

हे मां!देख,बहुत खुशी का दिन है,आज मातृभूमि के लिए हो गया मैं कुर्बान,
हो रहा जगत में तेरा ही गुणगान,बढ़ाई मैंने भी अपने वतन की आन,बान और शान, 

अब मैं आ रहा हूं अपने वतन, बड़े शान से तिरंगे में लिपट कर,
खुशी खुशी स्वागत कर, मां मेरा द्वार खड़े हो, खुशियों के आसूं लेकर,

बहुत फक्र है अब मुझे कि आज मैंने दोनों मांओं का ऋण एक साथ चुका दिया, 
वादा करता हूं मैं तुम दोनों से,अगले जन्म फिर यहीं वापस आऊंगा,

तुझ बिन,तुझसे दूर,सीमा पर बहुत समय गुजारे,नहीं भूला तेरी गोद और अपने बचपन को,  
मगर मां आज मुझे बहुत गहरी नींद आए,महीनों जो सोया नहीं,अब अपनी गोद में, सुकून से सोने दो, 
 
सारे कर्तव्य निभाए मैंने,लाज रखी तेरी व अपने प्यारे वतन की, 
वादा करता हूं,खाता हूं कसम अपने वतन की,इस माटी की,

सातों जन्म लेने,मैं फिर यहीं तेरे पास वापस आऊंगा,
और मां तेरी और मातृभूमि की सदा सेवा और रक्षा करूंगा।

वन्दे मातरम! वन्दे मातरम्!
भारत माता की जय!

डॉ बी. निर्मला,
मैसूर, कर्नाटक।

स्वरचित कविता एवम् सर्वाधिकार सुरक्षित।

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...