जिला :- महासमुंद
विधा :- छंद मुक्त कविता
विषय :- मित्रता
शीर्षक :- मित्रता का भाव
अलंकार :- असम अलंकार
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मित्रता का भाव लिए,
मन में रखते मीत।
अच्छा मित्र जीवन में,
भरता सुमधुर संगीत।
जग में मिले बहुत ही मित्र,
उसके जैसा मित्र नहीं।
आए जो लिए सुगंध नेह की,
ऐसा सुगंधित इत्र नहीं।
समझे जो जज़्बातों को मेरे,
उसके जैसा समझ नहीं।
नासमझी में भी जो साथ दे,
ऐसा कोई नासमझ नहीं।
संग में खेले संग ही खाए,
हर मुश्किल में संग भिड़ जाए।
खुशियों में मुस्कान बिखेरे,
दुख में संग जो अश्रु बहाए।
मुस्काते मोहन भी कहते,
सुदामा सा सखा नहीं ।
शायद मेरे हृदयतल को,
सिवाय मित्र के कोई देखा नहीं ।
जीवन में लिए जो आते,
मित्रता के भाव को।
अपने नेह भाव से भरते,
उर में उभरे घाव को।
मित्रता का भाव लिए,
मन में रखते मीत।
अच्छा मित्र जीवन में,
भरता सुमधुर संगीत।
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व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने जीवन में मित्रता के भाव को अपने शब्दों में पिरोने का प्रयास किया है।
साथ ही काव्य अलंकरण के लिए असम अलंकार का प्रयोग करने का प्रयास किया है।
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