जिला-कांकेर,छग
शीर्षक- मेघदूत
अलंकार-रुपकातिशयोक्ति
अलंकार
पावस ऋतु में उमड़ -घुमड़,
मेघ आयो,मेघ आयो री।।
मन बावरी पंछी सम उड़े फिरे,
मेघ क्या संदेशा लायो है री।
कभी बादल की आकृति निहारै,
कभी आसमां में एक टक ताकै।
मेघदूत के पीछे-पीछे भागत है,
उचक- उचक पकड़ न पावै।।
मेघ -मल्हार गाकर बुलावत है,
विरही मन -मीन -सा तडपावै।।
पवन- बैरी मेघ को उड़ा ले जावै,
संदेशा मेघदूत कछु कह न पावै।।
विरह -बाढ़ में नाव डगमगावत है।
मन की आग घर को झुलसावै।।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
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रुपकातिशयोक्ति अलंकार-
1-मेघदूत
2-मेघ -मल्हार
3-पवन -बैरी
4-विरह-बाढ़
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