Monday, August 10, 2020

दुर्ग से अनुरमा शुक्ला की रचना- महाभारत

रचनाकार-अनुरमा शुक्ला
स्थान-दुर्ग (छ.ग.)
विधा - मुक्तक,ध्वन्यार्थ व्यंजना अलंकार 
शीर्षक- महाभारत 


       *महाभारत*

कौरव और पांडवों के बीच
युद्ध का आगाज था,
महाविनाशकारी युद्ध की,
कुरुक्षेत्र  रणभूमि बनी,
युद्ध वृत्तांत दिव्यदृष्टि से,
संजय हर क्षण सुनाते हैं,
सुन भयावह ये बातें,
धृतराष्ट्र भी कांप जाते थे।

युद्ध का बिगुल बजने लगा
घोड़ो का हिनहिनाहट,
इनके टापूओं की आवाज,
तलवारों का टकराना,
धनुष-बाण की सरसराहट,
घायल योद्धाओं की चित्कार
दर्द से कराहना और तड़पना,
भागमभाग मचती, रणभूमि में
धूल-भरी आँधी चलती थी।
संध्या बेला में मंदिरों की घंटियाँ बजती थी,
मातायें अपने परिवार के कुशलता की दुआ माँगती थी ।

कृष्ण का अंदेशा सच हुआ,
विनाश हुआ ज्ञान का विज्ञान का
वीर क्षत्रियों के वीरगति होने से
इनका भी अभाव हुआ,
वैदिक संस्कृति और सभ्यता 
का भी पतन हुआ।
युद्ध से भला कब किसी का भला हुआ।
इतिहास गवाह है हमेशा देश का अहित हुआ,
अब ना ऐसा युद्ध देश में दोहराया जायेगा,
सदियों तक वेदव्यास रचित महाकाव्य महाभारत  गाकर याद रखा जायेगा ।

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