जिला -कांकेर,छग
शीर्षक-युद्ध
अलंकार-ध्वन्यात्मक व्यंजना अलंकार
युद्ध श्रेत्र में हो रहे
भीषण नरसंहार
मार -काट ,अंतर्नाद
गूंजते हुए सुन पाते
सभी मनुष्य किंतु
मनुष्य के मन में
हो रहे द्वन्द्व युद्ध
कीआवाज नहीं सुन
पाते कोई जिसकी
ध्वनि बहुत तेज
होती है सुपर सोनिक।
कट -कट कट काटती है
मन की आवाज़ को।
खट- खट -खट करती
मन के पीड़ा का तरंग
सोने नहीं देता इंसान को।
पट- पट -पट टूटता है
द्वन्द्व युद्ध में मन में
टांकी गई तुरपाई
जो नहीं सिलाता मन
किसी भी सुई से ।
हंसती है परछाई,
हंसते हैं दीवार पर
हरदम युद्ध रुक भी
जाता है एक दिन
किंतु संवेदनाओं
का तीर बहुत तेज
होता है हृदय भेदी
तेज बहुत तेज।।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर, छग
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ध्वन्यात्मक व्यंजना अलंकार-
1-पट- पट -पट टूटता द्वन्द्व युद्ध में मन।
2-कट -कट -कट काटती है मन के आवाज़ को।
3-खट-खट-खट करती मन के
पीड़ा का तरंग।
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उत्कृष्ट रवहन मीरा!!
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