कवयित्री- मीनाक्षी अवस्थी 'छाया',
बिलासपुर, छत्तीसगढ़।
विधा- कुँडलिया
विषय......श्रीकृष्ण जन्माष्टमी।
1. भादों माह,अष्टम तिथि, कृष्ण पक्ष अध रात।
विष्णु अवतरण कृष्ण बन,वासुदेव के हाथ।।
वासदेव के हाथ, धरा पर उतरे कृष्णा।
तृप्त कराने आज, कंस की सारी तृष्णा।।
कह 'छाया',नतमाथ, वृत्तियाँ हरदम साधों।
कृष्ण जन्म की रात,आई तिथि अष्टम भादों।।
2. कृष्ण पक्ष की अष्टमी, भादों आधी रात।
गोकुल के उद्धार को,प्रभु जी की सौगात।।
प्रभु जी की सौगात ,कंस की आई बारी।
अति की परिणति ज्ञात,अंत की अब तैयारी।।
कह 'छाया',मुसकाय , अब नियति प्रति प्रश्न दक्ष।
लिए विष्णु अवतार, कृष्ण का,चुने कृष्ण पक्ष।।
3.
कृष्ण कन्हैया जन्म पर,हर्षित सकल समाज।
आततायी नृप कंस पर,यही गिराए गाज।।
यही गिराए गाज, पुकारे भाँजा मामा।
पूरे करो हिसाब ,कर्म के आठो यामा।।
कह 'छाया',सुख पाय,प्रश्न हैं सभी सवैया।
गिरे कंस पर गाज,गिरावें कृष्ण कन्हैया।...........
मीनाक्षी अवस्थी 'छाया'
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