Monday, August 24, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- हे परम

रचनाकार :- नलिनी बाजपेयी
 विषय :- आध्यात्मिक  
 (प्रतीप अलंकार का प्रयोग)
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हे परम् पिता परमेश्वर
तुम ही पालनहार ईश्वर
मुझे अपना दरश करा दो।

मैं माटी का पुतला हूँ,
जीवन का अस्तित्व बताओ,
दिव्य नयन सा कमल है 
उसे खिला दो।

चारों ओर  घना तिमिर है छाया,
ज्ञान की अमर ज्योति जलाकर
सूर्य -चन्द्र को आलोकित कर दो।

रग-रग में अपनी कृपा पूंज से,
मानस का हर मर्म को स्पंदित कर,
अपनी दिव्य दृष्टि का बोध करा दो।

पथ दुर्गम,कँटीली राह मिले,
प्रतिपल ठोकर मुझे है लगे,
मेरी राहें तुम आसान बना दो।

गिरि, कन्दरा, वन,उपवन
जर्रे-जर्रे में एहसास जगाओ,
हिय को चैन नहीं 
अब तो अस्तित्व दिखा दो।

 है परम् पिता परमेश्वर,
तुम ही पालनहार ईश्वर,
मुझे अपना दरश करा दो।


*प्रतीप अलंकार का प्रयोग*-
1.दिव्य नयन से कमल है
2.ज्ञान की अमर ज्योति से सूर्य चन्द्र को आलोकित कर दो।

     नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर,(छ.ग.)

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