स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- कविता (प्रतीप अलंकार का प्रयोग)
शीर्षक -"प्रभु नाम"
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प्रभु से बड़ा प्रभु का नाम
भजले केवल राम - राम
तेरा हो जाएगा कल्याण
सत में तप का था काम
त्रेता में होते थे यज्ञ तमाम
द्वापर में चले थे तीरथ धाम
कलि में भजले केवल नाम
प्रभु से बड़ा प्रभु का नाम
भजले केवल राम - राम
तेरा हो जाएगा कल्याण
मन को रोक न बंदे
करले राम रटन के धन्दे
तेरे हो जाएंगे अमर प्राण
प्रभु करेंगे तेरा कल्याण
प्रभु से बड़ा प्रभु का नाम
भजले केवल राम - राम
तेरा हो जाएगा कल्याण
प्रभु से बड़ा प्रभु का धाम
माथे लगा ले धूल -ग्राम
तन-मन पवित्र हो जाएगा
चरण पड़ेंगे जब तेरे धाम
प्रभु से बड़ा प्रभु का नाम
भजले केवल राम - राम
तेरा हो जाएगा कल्याण
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प्रतीप अलंकार-: प्रभु से बड़ा प्रभु नाम,प्रभु से बड़ा प्रभु धाम।
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