जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
शीर्षक - " राम मंदिर का शिलान्यास "
विधा - छंदमुक्त कविता
अलंकार - श्लेष अलंकार
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राम नाम की गंगा बहने लगी है।
द्वार-द्वार आरती सजने लगी है।
इतिहास से विलंब था यह पल,
हकीकत में अब बदलने लगी है।।
वंदना करूँ मैं प्रभु श्रीराम।
नदी तीर, पर शत्रुओं का नाम।।
राम मेरी पहचान है।
हिंदुओं का अभिमान है।
मर्यादा पुरुषोत्तम लीलाधारी,
प्रभु ही करुणानिधान है।।
छेड़ चुका विद्रोहियों में संग्राम।
विहंग से विहंगम मधुर शाम।।
मंदिर की आधारशिला आधार रखने वाली है।
भक्तों के मन मंदिर में श्रीराम रमने वाली है।
भगवा पताका लहरायेगा आसमान में,
चिड़ियाँ भी श्री राम का गुणगान करने वाली है।।
प्रभु की कृपा से सफल यह काम।
सिया लखन सहित पधारो निज धाम।।
वर्षों इंतजार के बाद यह शुभ घड़ी आई है।
श्रद्धा से मैंने भी स्वागतम् दीप जलाई है।
गौरवशाली हुआ पूरा भारतवर्ष,
चारों तरफ खुशियों की लहर दौड़ आई है।।
सुरभि श्री श्रुति उच्चारण श्रीराम।
मन प्रफुल्लित और तन को देत विश्राम।।
नर-नारी का यह सम्मान है।
राम राज्य का यह प्रमाण है।
मंदिर पर राजनीति करने वालों,
आना आज भूमिपूजन और अनुष्ठान है।।
रोकने की कोशिश हुई बहुत तमाम।
अयोध्या में बिराजे अंततः श्रीराम।।
प्रभु की महिमा का पार कोई न कर पाया है।
राम नाम के चमत्कार से तो
पत्थर भी जल में तैर आया है।
भक्तों का उद्धार करके,
दुष्टों को कालदेव तक पहुँचाया है।।
हर कोई लेत अब प्रभु का ही नाम।
जय जय श्रीराम जय जय श्रीराम।।
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श्लेष अलंकार का प्रयोग :-
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1. तीर-- किनारा, बाण
2. विहंग-- चंद्रमा, बादल
3. सुरभि-- पृथ्वी, सुगंधित
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जय श्री राम
ReplyDeleteजय श्री राम
ReplyDeleteजय जय श्री राम___!
ReplyDeleteजय श्री राम🚩🚩
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