Wednesday, August 5, 2020

रायपुर से देवयानी शुक्ला की रचना- अवध

01. रचनाकार का नाम : देवयानी शुक्ला
02. जिला :- रायपुर (छत्तीसगढ़) 
03. छंद :- मुक्तक
04. रचना का शीर्षक :-  *अवध पुरी*


हे राम ! तुम्हारे *भाग* में
लिखा था फिर वनवास ।
आधी सदी के बाद में
अब आया मधुमास। (1)

*हरि* को शीश नवाइए ,
मिटेंगे सब संताप ‌।
*हरि* बिना अपूर्ण हैं
निशा , दिवस , हरि आप । (2)

सरयू के तट पर बसा ,
पावन कौशल धाम ।
राम नाम से ही मिले ,
*निष्कामों को दाम* । (3)

कितनी *भारी* थी अहो!
*राम लला की बाट* ।
एक ओर विश्वास था ,
एक छोर सम्राट । (4)

आस्था निष्कंटक हुई ,
मन पाए विश्राम ।
अभय भक्ति को है मिला ,
*अवध पुरी है नाम* । (5)

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श्लेष अलंकार

(1) *भाग* - भाग्य और हिस्सा

(2) *हरि* -ईश्वर , चंद्रमा , सूर्य , हनुमान 

चंद्रमा बिना रात ,सूर्य बिना  दिन ,  हनुमान बिना राम अपूर्ण हैं ।

(3) *निष्काम* - साधू , बेरोजगार
 *दाम* -  महत्व ,काम का दाम 
 
(राम मंदिर निर्माण से
रोजगार के अवसर मिलेंगे और तीर्थ में साधुओं को सम्मान मिलेगा ।)
     
(4) *राम लला की बाट* - 
*राम लला को तौलने वाला बट्टा बहुत भारी है , क्योंकि वे अतुल हैं ।

*राम लला की प्रतीक्षा अत्यंत भारी यानि कठिन थी ।


(5) *अवधपुरी* -

* राम की अयोध्या पुरी ।
 
* ऐसी पुरी , जहाँ वध न हो ।
 ( राम राज में आस्था और भक्ति निर्भय होंगी अब इस अवध पुरी में किसी की भावनाओं का वध नहीं होगा । )
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1 comment:

  1. Waah Bahut khoob जय जय श्री राम

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