जिला बेमेतरा छत्तीसगढ़
विधा कविता
शीर्षक राधाकृष्ण
राधाकृष्ण
राधा कृष्ण दो थे किन्तु,
उनका मन था एक।
एक दूजे को समझते थे वो,
अथाह करते थे प्रेम।
एक याद में ही आ जाते,
कृष्ण कन्हैया लाल।
राधा उनकी हर बात समझती,
बिन बोले पुरी करती हर एक आस।
कृष्ण की बंसी में खो जाती,
राधा सुध बुध छोड़।
कृष्ण बेसुध उन्हें देखते रहते,
ना जाने कब हो जाती भोर।
एक दूजे के मन को पढ़ लेते,
बिना कहे हर बात।
राधा की इच्छा सर्व प्रिय कान्हा को,
तो कान्हा की इच्छा पूरी होती राधा जी के साथ।
अद्भुत, अलौकिक प्रेम हैं उनका,
कह पाना नहीं मुमकिन।
विवाह बंधन में ना सही,
पर बंधे रहे प्रेम के बंधन।
आज भी नाम लिया जाता है,
राधाकृष्ण का एक संग।
केवल यह संजोग नहीं,
विश्व को प्रेम शिक्षा देने को।
दर्शन दिए थे जग में,
अवतरित हुए श्री कृष्ण रूप में स्वयं भगवान।
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