ग्राम -बुलाँकी
जिला- रायगढ़( छत्तीसगढ़ )
विधा -कविता
शीर्षक -"जीवन का पड़ाव"
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*जीवन का पड़ाव*
जीवन एक संघर्ष है।
जीवन है जटिल।
जीवन सरस ,सरल है ।
जीवन मधुर संगीत।
जीवन का ऐसा स्वरूप।
बचपन ,युवा, बुढ़ापा।
खेल, श्रम ,विश्राम ।
यही जीवन का रंग।
जीवन एक ऐसा है।
जहांँ दुख सुख का वास।
एक नर्क एक स्वर्ग ।
चले जीवन साथ -साथ
जीवन एक अनमोल है।
कोई जान सके तो जान।
जो जीवन की मूल समझे।
जीवन सरल बन जाए।
जीवन के हर पड़ाव में,
होता है क्रम से परिवर्तन।
आहिस्ता -आहिस्ता जीवन में,
अंतिम होता पड़ाव से ठहराव।
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व्याख्या :-इस कविता में जीवन के पड़ाव से लेकर अंतिम ठहराव अर्थात मृत्यु तक की परिवर्तन को व्यक्त किया गया है। जीवन में किस तरह से क्रम से परिवर्तन होता है और अंतिम ठह राव अर्थात मृत्यु को प्राप्त करता है।
उल्लेख आदि अलंकार- जीवन को लोग विभिन्न स्वरूपों में देखते हैं कोई बचपन ,युवा ,बुढ़ापा सुख - दुःख, जटिल ,सरस ,सरल ,संघर्ष आदि।
उर्मिला सिदार रायगढ़ छत्तीसगढ़
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