Friday, August 28, 2020

रायगढ़ से गुलशन खम्हारी "प्रद्युम्न" की रचना- स्वेद रज

रचनाकार-गुलशन खम्हारी "प्रद्युम्न"
जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
विषय- सेवा या श्रम पर आधारित
विधा- अपह्नुति अलंकार
शीर्षक- "स्वेद रज"
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श्रम का प्रादुर्भाव है स्वेद रज,
यह रज नहीं माणिक्य भाव है स्वेद रज ।

लहू प्रवाह का आवाहक है स्वेद रज,
धरा स्थिर नहीं धरा संचालक है स्वेद रज ।।

वैमनस्य भाव का अभाव है स्वेद रज,
मलिन गंध जलधार नहीं निश्चलगंग स्वभाव है स्वेद रज ।

हनु हनुमंत उद्भव मकरध्वज है स्वेद रज,
नतमस्तक शीश नहीं अजेय गरुड़ध्वज है स्वेद रज ।।

श्रम का प्रादुर्भाव है स्वेद रज,
यह रज नहीं माणिक्य भाव है स्वेद रज ।।

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गुलशन खम्हारी "प्रद्युम्न"
रायगढ़ (छत्तीसगढ़)

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