Friday, August 28, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- सेवा एवं श्रम

रचनाकार :-नलिनी बाजपेयी
        संबलपुर, जिला-कांकेर,(छ .ग.)
   विषय :- *सेवा एवं श्रम*
 (अपन्हुति अलंकार का प्रयोग)
    

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             *श्रमवीर*
मैं श्रमवीर हूँ,श्रम नहीं 
उम्मीद बेचता हूँ।
स्वेदकण नहीं मोती के 
दानों से,सौगात बाँटता हूँ। 

मैं मजबूर नहीं मजदूर हूँ ,
निर्माणों की श्री 
अपने खून की लाली से 
सींचता हूँ।

अभावों में पलता हूँ,
टूटे सपनों को जोड़-जोड़कर,
लालसा नहीं अपने 
सपनों को रौंदता हूँ।

हर अरमानों को 
तोड़-तोड़कर कर
हौसला नहीं अपने 
शौक बेचता हूँ।

ओ हवेली वालों 
कुछ हम पर भी दृष्टि डालो,
किश्तों में बंटी जिंदगी को 
यूँ ना उछालो।

मेरी मजदूरी नहीं 
अरमान है,
तुम हसीं रंगों वाले 
पंख दे दो।

उन्मुक्त गगन में उड़ने दो,
खलल ना डालो,
बस मैं भी मुस्कुरा सकूं,
मुस्कान नहीं मेरी जिंदगी है,
उधार दे दो।

मैं श्रमवीर हूँ, 
श्रम नहीं उम्मीद बेचता हूँ,
स्वेद कण नहीं मोती के 
दानों से सौगात बाँटता हूँ।

*अपन्हुति अलंकार का प्रयोग*

1.श्रम नहीं उम्मीद बेचता हूँ।
2.स्वेद कण नहीं मोती के दाने।
3.मेरी मजदूरी नहीं अरमान

     नलिनी बाजपेयी
 संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)

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