Tuesday, August 4, 2020

रायपुर से देवयानी शुक्ला की रचना- गुमराह

01. रचनाकार का नाम :
देवयानी शुक्ला
02. जिला :- रायपुर (छत्तीसगढ़) 
03. छंद :- मुक्तक
04. रचना का शीर्षक :- *गुमराह*

सफ़र में ज़िंदगी के 
कभी ऐसा भी होता है ,
कभी गुम राह होती है ;
कोई गुमराह होता है ‌।

ज़रा दो लफ़्ज़ अपनेपन के
कहना सीख लो यारों ,
वहीं परवाह होती है ,
जहाँ पर वाह होता है ।

दिलों में दाग़ (ईर्ष्या) लेकर जीने वालों !
ये भी तय कर लो ,
दाग़ (कलंक) चाहत पे लगाना भी 
गुनाह होता है ।

मुझे कह ना (मत कहो) कि कह ना (बोलो)!
कह ना पाऊंगी ;
कि कहने से ही अक्सर
मामला तबाह होता है ।
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