नाम- पुष्पेन्द्र शुक्ला "पुष्पराज"
जिला- जशपुर छत्तीसगढ़
विधा- गीत
शीर्षक- रक्षाबंधन
*गीत*
स्नेह का बंधन है ये,
नाम है रक्षाबंधन--२
रिश्तों में प्यार छुपा है,
पर्व है रक्षाबंधन--२।।
भाई के कलाई पे राखी,माथे पे चंदन है,
बहनों का प्यार देखो, जैसे कोई कुंदन है।--२
रक्षा की जो खाई कसमें---
बताती ये रक्षाबंधन,,,, स्नेह का--
सब कुछ लूटा दूं मैं, तेरे प्यार पे बहना,
जिंदगी भर यूं ही, रिश्ते निभाते रहना,,--२
सबसे पावन ये नाता,
भाई-बहनों का बंधन,,,, स्नेह का--
जब तक रहेंगे, आसमां में तारे,
चंदा तू बन के भैया,हरना दुःख हमारे।--२
कामना यही,करती बहना,
जीवन में न हो रूदन,,,,
स्नेह का बंधन है ये,
नाम है रक्षाबंधन-२
रिश्तों में प्यार छुपा है,
पर्व है रक्षाबंधन--२।।
पुष्पेन्द्र शुक्ला "पुष्पराज"
Bahut badhiya lekh hai
ReplyDeleteबहुत सुंदर कविता है 🍓🍓🍓
ReplyDeleteअति सुंदर
ReplyDelete������