Friday, August 7, 2020

रायगढ़ से पुष्पा पटनायक की रचना- भगवान विष्णु

रचयिता- पुष्पा पटनायक 
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
शीर्षक -"भगवान विष्णु"(पुनरुक्तादोभाष अलंकार)
विधा- छंदमुक्त कविता
******************
अनंत-अनंत हो आप प्रभु
कोई नहीं समकक्ष तुम्हारे ।

सुख- दुख    से   परे   हो 
सब  आते  चरण  तुम्हारे ।

अनंत  के    छत्रछाया  में 
छीर   सागर   में   समाते ।

सब का ज्ञान-अज्ञान हैं बनते
और   मन्द- मन्द    मुसकाते ।

जो  जान-जान जाता सब
मन- मनका   पाता    तब ।

वो आमोद-प्रमोद से उबर
आत्मा- आत्मिक सुख पाते ।

सरल अडिग चल निरंतर
भव-भवसागर से  तर  जाते।
************************

पुनरुक्तादोभाष अलंकार- अनंत-अनंत (जिसका अंत न हो,विष्णु, शेषनाग)
मन-मनका(हृदय, भक्ति रूपी मोती)
जान-जान(जीवन,जानना)
आत्मा-आत्मिक(आत्मा, आत्मा को तृप्त करने वाला सुख)
आमोद-प्रमोद(सांसारिक खुशियों )
भव-भवसागर( संसार,भवसागर)

1 comment:

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...