निवास-बैरन-बाज़ार,रायपुर ।
जिला-रायपुर ,छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक- "तर्क "
विधा-छंद-मुक्त,कविता ।
(पुनरुक्तावभास अलंकार का
प्रयोग)
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○●☆¤==|| तर्क ||==¤☆●○
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पानी-पानी,बिन जीवन नहीं,
चेहरे में छाये रौनक व बुझे प्यास नहीं।
भूख-भूख,आगे बढ़ने व बुझाने की,
इच्छा व पेट भरने की,होती सबकी ।
लोग तो कभी-कभी,प्यार में मिट जाते
जान- -जान के लिए भी, लुट जाते ।
किसानों में खुशी,जब अधिक होती है,
उपज-उपजा,पाने व उसे लगाने कीहै।
लोग बाजीगर में,देखा करते हैं,
बाज-बाजी हुनर व जीतने की है ।
युद्ध में,सैनिकों के बीच होती है,
चाल-चालाकी,जीतने व व्यूहरचना है।
खनक-खनक ,दौलतमंद है,बाजे,
इसके बिन न भागे,सुन रुक जाते ।
खेल -खेल में,हार और जीत की,
भूख रहती,खिलाड़ी व विरोध की ।
नदियाँ,अक्सर बहती -बहाती हैं,
बरसात में,पेड़-पौधे,बाढ़ में बहते हैं।
रुपये-पैसे बिन,रहे सुख अधूरा,
मैल-मलिन,हाथ का हैधुले बिनअधूरा।
सजाती-सजती, औरत बन घर को,
परिवार को,रिझाती अपने साजन को।
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व्याख्या:-उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि कुछ पर्यायवाची शब्द का प्रयोग,अर्थ भिन्नता व अर्थ में रखते हुए प्रस्तुत है।
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$$$==स्वरचित-प्रस्तुति ====$$$
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