Tuesday, August 25, 2020

रायपुर से एच-एस-अरमो की रचना- रोशनी

रचनाकार-एच-एस-अरमो "अरमान "
निवास-रायपुर ,छत्तीसगढ़ ।
जिला-रायपुर ।
शीर्षक-"रोशनी सूरज की चाँद पर "
विधा-छ्न्द-मुक्त (कविता)
अलंकार-दीपक अलंकार ।
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●रोशनी सूरज की चाँद पर ●
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सूरज से चाँद,
कभी नहीं मिल पाता,
फिर भी,सूरज की रोशनी,
से अपना जीवन,है पाता ।

इक दिन ऐसा आता,
चाँद पर ग्रहण लग  जाता,
चाँद ,तुम हो कितने शीतल,
पर ,तुममें भी, दाग है,
क्या- तुममें,निराशा अमावस्या की,
और खुशियां,धमक जाती,पूर्णिमा की।

ऐसा ही,सबका जीवन है,
आत्मा,अजर-अमर है,
शरीर तो, नश्वर है,
फिर भी, क्यों---?
जीवन में,इतना इतराता है ।

"अरमान "कहता है,आप सभी से,
अपनी नाकामियों से,सबक सीखें,
नई राह पर चलें ,
तुम भी,जरूर  इक दिन,
सूरज की तरह,
औरों को,रोशनी दिखाओगे--?
व चाँद की तरह शीतलता दोगे ।



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व्याख्या -उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि सूरज के बिना चाँद का कोई अस्तित्व नहीं है और सूरज और चाँद की उपमा मानव जीवन दर्शन पर क्या होता है,बतलाने की चेष्टा की है ।
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