Saturday, August 1, 2020

कोरिया छत्तीसगढ़ से कवयित्री तारा पांडेय"मुक्तांशा"जी की कविता- रक्षा बंधन

तारा पांडेय"मुक्तांशा"
बैकुंठपुर, जिला_कोरिया
छत्तीसगढ़।
शीर्षक_"रक्षा बंधन"
 
  सुनो, 
रेशमी धागों का
सुनहरा त्यौहार
आने वाला है
जिसमे छिपा होता है
भाई बहन का प्यार
जिसका करती हैं
बहने बेसब्री से इंतजार
भाइयों को भी प्रतीक्षा
रहती है, क्योंकि
उनकी सुनी कलाई भी
सुंदर राखियों से सजती है
बहन बांधती है रक्षासूत्र
करके प्रभु से प्रार्थना
रक्षा कीजिएगा मेरे भैया की
मेरी यही विनय कामना
माथे पे तिलक लगाती है
नहीं भूलती, आरती उतारना
भैया भी, प्रतिबद्ध होते
बहन की राखी का है लाज रखना
कहते ओ प्यारी बहना
हमेशा यूं ही खुश रहना
बहन भाई की बलैयां लेती
कहती किसी की नज़र ना लगे
ओ मेरे प्यारे भैया, आपको
मेरी भी उमर लगे
ना टूटे कभी भी भाई बहन
का ये अनमोल बंधन
सदा सलामत रहे
ये पवित्र रक्षा बंधन।
     तारा पांडेय"मुक्तांशा"

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