स्थान-दुर्ग (छ.ग.)
विधा - मुक्तक
शीर्षक - *भाई-बहन का नेह बंधन*
भाई-बहन के स्नेह का ,
है यह पवित्र त्यौहार ।
करती हूं इन्तजार भैया,
आओगे ना इस बार ।
विपत्ति की ऐसी घड़ी है आई,
पर सूनी ना रहने दूंगी कलाई ।
अब के ईश्वर से माँग लूंगी,
तुम्हारी कुशलता की दुहाई।
नहीं आओ तो बड़े प्रेम से राखी मेरी बँधवा लेना,
बाँधता बनके बंधन,ये बंधन बाँधे है मन ।
भेजा है मैने चंदन-वंदन,रेशम का रेशमी स्नेह,
मधुर मंद मुस्कान मुदित मन, मन से मन का मेल।
स्वस्थ सकुशल सदा साथ-साथ रहना,
जीवन भर है यह प्यारा रिश्ता निभाना ।
अब के राखी में ..आओगे ना भैया
करती इंतजार है ...ये बहना
अनुरमा शुक्ला
दुर्ग (छ.ग.)
❤️❤️❤️❤️❤️❤️
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