Monday, August 3, 2020

दुर्ग से अनुरमा शुक्ला की रचना- भाई बहन का नेह

रचनाकार का नाम- अनुरमा शुक्ला
स्थान-दुर्ग (छ.ग.)
विधा - मुक्तक 

शीर्षक - *भाई-बहन का नेह         बंधन*


भाई-बहन के स्नेह का ,
       है यह पवित्र त्यौहार ।

करती हूं इन्तजार भैया,
       आओगे ना इस बार ।

विपत्ति की ऐसी घड़ी है आई,  
    पर सूनी ना रहने दूंगी कलाई ।

अब के ईश्वर से माँग लूंगी,
    तुम्हारी कुशलता की दुहाई।

नहीं आओ तो बड़े प्रेम से राखी मेरी बँधवा लेना,
बाँधता बनके बंधन,ये बंधन बाँधे है मन ।

भेजा है मैने चंदन-वंदन,रेशम का रेशमी स्नेह,
मधुर मंद मुस्कान मुदित मन,  मन से मन का मेल।

स्वस्थ सकुशल सदा साथ-साथ रहना,
जीवन भर है यह प्यारा रिश्ता  निभाना । 

अब के राखी में ..आओगे ना भैया
करती इंतजार है ...ये बहना 
    

               अनुरमा शुक्ला
                 दुर्ग (छ.ग.)

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