रायगढ़, छत्तीसगढ़
विषय-राम पर आधारित ( श्लेष अलंकार का प्रयोग)
विधा-छंद मुक्त काव्य
शीर्षक- जय श्री राम
भक्ति के प्रतीक हैं राम
शक्ति के स्वरूप हैं राम
क्रांति के आह्वाहन हैं राम
मानवता की पहचान हैं राम
जय श्री राम ,जय श्री राम।।
सदियों की प्रतिक्षा के उपरांत
आज सरयू के तट पर पधारे
जानकी संग राम निज धाम
मंगल -ध्वनि और स्वर-लहरी से
गूंज रहा आज अयोध्या धाम
जय श्री राम,जय श्री राम।।
सजी है स्वागत को दुल्हन सी
आहुतियों से गुंजायमान
आज पुष्प बरसा रहे
स्वर्ग से धरा पर भगवान
आज एक ही स्वर है भारतवर्ष का
जय श्री राम,जय श्री राम ।।
सुख में राम दुख में राम
जीवन के कण-कण में राम
हमारे मन मंदिर में राम
आस्था और विश्वास में राम
जय श्री राम ,जय श्री राम।।
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