Wednesday, August 5, 2020

बिलासपुर से सावित्री यादव "सावि" की रचना- श्रीराम

रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
              बिलासपुर  छ. ग.
              विषय _श्री राम जी
              
शीर्षक _मर्यादा  पुरुषोत्तम  राम 

जो सीता  के पति   राम |
अयोध्या है |जिनका धाम |
करना पड़ा |आज्ञा  का पालन |
गए वनवास लेकर सीता  लक्ष्मण ||1|

छोड़ दिए राज सुख  चले फर्ज निभाने |
माँ कौसिल्या के प्यारे  कैकैयी  की बात माने |
ऐसे श्री राम है |सीता के  मीत मनभावन |
जैसे सीता राम बोलते  ही होता है| मन पावन |

सबकी लाज रख चले| वनवास  मे रघुकुल के दीपक |
जिनके जाते अयोध्या  मे हो गए| प्रजा जन व्याकुल |
दुष्ट  रावण ने हरण किया |सीता का धर  का रूप  साधु का 
लक्ष्मण  ने तो खींचा था | रेखा सीता माँ की रक्षा  का |
बाली मार किष्किंधा मे सुग्रीव   को सौपा राज |

सीता माँ का पता लगाने हनुमान को दे दिया | काज |
ले वानर सेना चले जानकी लेने बाँध सेतु  साज |
सबको मारे एक, एक कर रावण का किया उद्धार 
सीता ले वापस चले  सौपे विभीषण  लंका प्रभार 

अयोध्या  पहुँच फिर राम ने लिया हाथ मे राज |
प्रजा की खातिर कर दिया फिर सीता  का त्याग |
ये कैसी विडंबना  ये कैसा विधान सीता से दूर हुये राम |
ये कैसा  था निर्णय सिया ने  छोड़ा राम निज धाम |
सुन लेते जो सबकी अर्जी,सीता की जिसने ले ली परीक्षा |
कर दिए उनको अपने से दूर जिनकी करनी  थीं रक्षा |

वाल्मीकि  ने कन्या बना रखा सिया को अपने पास |
पिता तुल्य थे |वाल्मीकि दिया साथ जानकी का |
लव -कुश  दो पुत्र रत्न पाया जानकी ने वन  में |
राजकुमारों के किस्मत में था|उनका लालन पालन हो वन मे 

उचित समय देख वाल्मीकि जी ने कहा  राम रत्नो से |
अब आ गया समयअयोध्या वालो से उत्तर पूछो सवालों से |
नन्हें बालक अयोध्या  नगरी में जाकर राम कथा सुनाते है |
अपने शब्दों में राम के संग जानकी की व्यथा कहते है |

ज़ब सीता की पवित्रता  का वाल्मीकि  ने किया भरोसा 
कहे भगवान राम से विनती करे स्वीकार  इस आशा  से 
पुत्री  पवित्र  है |अब राज धर्म छोड़ स्वामी धर्म निभाओ 
राम ने कहा  शपथ  एक बार फिर सीता को लेनी होंगी 

सीता ने शपथ  लिया अगर हूँ| पवित्र तो हे धरती माँ आप 
अपने निज स्थान  में मुझे गोद  में समा ले धरती माँ आप 
मेरे मन में मेरे जीवन में प्रभु श्री राम के आलावा और क़ोई नहीं हो तो माँ  मुझे आप अपने गोद में स्थान दो |

चली जानकी पवित्रता  की बखान कर |
अपनी जन्म माता  धरा  के संग |
यही राम गाथा  गाता  भक्त जन मन में लिये उमंग |
ह्रदय  से बोलो  सिया राम चंद्र  की जय |
सिया राम चंद्र  की जय |

व्याख्या _ श्री राम जी के जीवन का वर्णन |
               श्लेष  अलंकार  दीपक  _ दीप, वारिस 
                                    रत्नो - रत्न और बच्चे से आशय
                                    राज _क़ोई गुप्त बात और राज  
                                              करना 
रचनाकार  _सावित्री यादव "सावि "
               

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