रचनाकार-एच-एस-अरमो "अरमान "
निवास-रायपुर ,छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक- ""भारत ""
विधा -कविता ।
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¤||||•••☆भारत ☆•••||||¤
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भारत धरा है,प्रायद्वीपीय रूप धरा,
शीर्ष में हिमालया,तीनों ओर सिंधु हिलोरा ।
कहीं हिमशिखर,कहीं है ऊंची-ऊंची पर्वतमाला,
घने वनों से आच्छादित,वन प्राणियों का रखवाला ।
धरा में बहती अविरल नद की धारा,
गंगा,ब्रह्मपुत्र,सतलुज की,विशालता-धरा ।
तीर्थस्थल,पर्यटन-स्थल,बसाहट धरा,
धरा,धरती,माँ,जननी-सा,कोख हरा ।
ठंडी,गर्मी और बरसात का हो फेरा,
धरा निखरे,फुलवारी,हरियाली,तपती धरा।
हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख,ईसाई,बसे इस धरा,
सब धर्मों की,सम्मानित स्थल,बनी ये धरा।
संत-मुनि-महात्माओं की,तपो धरा,
राजा-महाराजा,गढ़-किले,स्मारकों को धरा ।
भारत की थलाकृति,भौगोलिक छटा है न्यारी,
जहाँ बसते जन-सैलाब,निर्भयता,उर्वरता है प्यारी।
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व्याख्या-उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि भारत की धरा की वैभवता व थलाकृति ,रूप धरा का वर्णन किया है ।धन्यवाद ।
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