स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- कविता (दीपक अलंकार का प्रयोग)
शीर्षक -"ब्रम्ह ज्ञान"
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ब्रहम ज्ञान सम आत्मज्ञान
स्वविवेक सम बुद्धि प्रदान
जीव सम सजीव समान
जीवन सम अद्भुत मान
सत मिलन सम प्रभु मिलन
आत्मा सम परमात्मा समान
मोक्ष को प्राप्त करता तन
नारायण सम मिल जाता मन
वह बैकुंठ में पाता स्थान
स्वर्ग सम बैकुंठ समान
नर हो सम नारायण समान
तब कौन नर कौन नारायण जान
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दीपक अलंकार:-ब्रह्म ज्ञान सम आत्मज्ञान,जीव सम सजीव समान,आत्मा सम परमात्मा,सत मिलन सम प्रभु मिलन, नर सम नारायण समान,।
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