स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- कविता ( रूपकातिश्योक्ति अलंकार का प्रयोग)
शीर्षक -"मेघ और बरखा"
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आहट कर मेघ बुलाये
बलखाये बरखा आये
नयन मार तीर चलाये
शर्म से पानी हो जाये
घनघोर दरबार सजाये
बरखा संग परिणय करे
मोर नृत्य से रिझाये
तालठोक टोप गीत गाये
अमृत रस रुत बरसाये
मोती बन सीप में जाये
बूंदे बन जब पड़े तन
अंग-अंग उमंग भर जाये
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व्याख्या :- बादल गर्जना और वर्षा का होना को मानवीकरण कर एक प्रेमी, प्रेमिका के रूप में , रूपकातिश्योक्ति अलंकार का प्रयोग किया गया है ।
Nice mam👌👌👌
ReplyDeleteNice 👌👌👌
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