जिला - बलौदा बाजार ( छ. ग. )
विषय - पर्यावरण का मानवीकरण
विधा - छंद मुक्त कविता
अलंकार - रूपकातिशयोक्ति अलंकार
शीर्षक - वर्षा रानी
कभी अचानक आसमान में ,
वर्षा रानी आती ।
काले केशों को लहराती ,
चम-चम दाँत दिखाती ।।
गुनगुनाती खिलखिलाती ,
कभी भयानक शोर ।
देख-देख प्रफुल्लित मन से ,
वन में नाचे मोर ।।
टप-टप छप-छप झिमिर-झिमिर ,
पायल की झनकार ।
बलखाती - इठलाती वर्षा ,
बरस रही जल धार ।।
नदी नाले झरना अलापते ,
कलकल -झरझर का संगीत ।
टर्र - टर्र मेंढक भी गाते ,
वर्षा सुंदरी के संग प्रीत ।।
ताल -तलैया खेत -खलिहान ,
जल ही जल से व्याप्त ।
पर्वत पठार जंगल घाटी ,
सबकी प्यास समाप्त ।।
वर्षा रानी के जाने से ,
मौसम हुआ सुहावन ज्यादा ।
झुरमुट- झुरमुट पेड़ों से ,
झाँक रहा सूरज दादा ।।
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