Thursday, August 27, 2020

बलौदाबाजार से लीलाधर प्रजापति की रचना- पर्यावरण

रचनाकार - लीलाधर प्रजापति
जिला - बलौदा बाजार ( छ. ग. )
विषय - पर्यावरण का मानवीकरण
विधा - छंद मुक्त कविता
अलंकार - रूपकातिशयोक्ति अलंकार
शीर्षक - वर्षा रानी

कभी अचानक आसमान में ,
वर्षा  रानी  आती ।
काले केशों को लहराती ,
चम-चम दाँत दिखाती ।।

गुनगुनाती खिलखिलाती ,
कभी भयानक शोर ।
देख-देख प्रफुल्लित मन से ,
वन में नाचे मोर ।।

टप-टप छप-छप झिमिर-झिमिर ,
पायल की झनकार ।
बलखाती - इठलाती वर्षा ,
बरस रही जल धार ।।

नदी नाले झरना अलापते ,
कलकल -झरझर का संगीत ।
टर्र - टर्र मेंढक भी गाते ,
वर्षा सुंदरी के संग प्रीत ।।

ताल -तलैया खेत -खलिहान ,
जल ही जल से व्याप्त ।
पर्वत पठार जंगल घाटी ,
सबकी प्यास समाप्त ।।

वर्षा रानी के जाने से ,
मौसम हुआ सुहावन ज्यादा ।
झुरमुट- झुरमुट पेड़ों से ,
झाँक रहा सूरज दादा ।।

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