Wednesday, August 12, 2020

बलौदाबाजार से संतराम कुम्हार की रचना- स्वदेशी अपनाओ

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
   शीर्षक  -  " स्वदेशी अपनाओ "
     विधा - छंदमुक्त कविता 
अलंकार - अनन्वय अलंकार
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बाहरी देश के सामान का बहिष्कार करो। 
विदेशी तो विदेशी है, 
उसका तिरस्कार करो।
अपनाओ स्वदेशी बनो आत्मनिर्भर, 
मजबूत अपने देश का परिवार करो।। 

दूसरों के अहसान तले, 
दबे रहोगे कब तक। 
विकास की गाड़ी नहीं बढ़ेगा, 
आगे नहीं आओगे जब तक।।
बंदिशों की खड़ी एक दीवार करो। 
देशी निर्मित वस्तु को स्वीकार करो।।

आत्मनिर्भरता से हमें इसे, 
दुल्हन-सा सजाना है। 
एक बार फिर से हमें, 
सोने की चिड़िया बनाना है।। 
बायकाॅट का गहरा एक प्रहार करो।
प्रयोग एकता का तुम औजार करो।। 

चाइना वालों का औकात हमें,
भारतवर्ष को दिखाना है। 
चीनी तो आखिर चीनी है, 
घोल-घोल पी जाना है।। 
मुजरों का बंद तुम बाजार करो। 
टिक-टाॅक को आजीवन बीमार करो।। 

मजबूत भारत का निर्माण हमें, 
हर हाल में करना है।
स्वदेशी की राह पर सबको, 
निरंतर यों ही चलना है।। 
चीनी चालबाजों पर पलट तुम वार करो। 
शेर बन गीदड़ का तुम शिकार करो।। 

अपना भारत तो भारत है,
हर मौसम में तिरंगा लहरायेगा। 
सैकड़ों इतिहास बनाये हैं इसने,
अब स्वदेशी पर भी लिख जायेगा।। 
गंभीरता से इस पर विचार करो। 
स्वदेशी से बेइंताह प्यार करो।। 

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 अनन्वय अलंकार का प्रयोग :-
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1. विदेशी तो विदेशी है
2. चीनी तो चीनी है 
3. भारत तो भारत है ।

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