Saturday, August 1, 2020

महासमुन्द, छत्तीसगढ़ से कवि शंकर गोयल जी की कविता-अभी भी समय है

कवि-शंकर गोयल
पिथौरा, महासमुन्द, छत्तीसगढ़
शीर्षक-अभी भी समय हैं

अभी भी समय है

क्या तुम 
नहीं चाहते थे-
फूल खिले,
और गूंजे,
भौरों की गूँजन
तितलियां उड़े ?
नहीं चाहते थे तुम -
शरद आकाश ,
बसंत की हवा,
अमराइयों का उत्सव, 
कोयल की कुहू, 
हिरणों की कुलांचें?
तुम्हें तो पसंद थे भेड़िए,
भेड़िए- से- धीरे-धीरे 
जंगली आदमी,
समूची हरियाली
निकल गए,
बना दिया सबको 
अंधा- बहरा,
अभी भी समय है।
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- शंकर गोयल

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