कवि :- विनोद कुमार "जोगी"
पता:- जोगीडीपा, सरायपाली, महासमुंद, छत्तीसगढ़
शीर्षक :- " सोच रहा है किसान"
बैठा जोगी मेड़ पर,
सोच रहा है किसान।
क्या सच में कहते मुझे?
महान ये सारा जहान।
कहते हैं कर्मठ बड़े हम,
लगाते है निज जी जान।
अन्न उगाते मेहनत से हम,
हो पाता देश का खान पान।
खुद रह लेते अभावों में हम,
सीधा सादा है परिधान।
हम बसे हुए हैं हिन्दुस्तान में,
हममें बसा सकल हिन्दुस्तान।
फिर सोचता है मन में यह,
बनना चाहे सब कुछ इंसान।
डाॅक्टर बने, अभियंता बने,
पर क्यों ना चाहे बने किसान?
बैठा जोगी मेड़ पर,
सोच रहा है किसान।
क्या सच में कहते मुझे?
महान ये सारा जहान।
कवि :- विनोद कुमार "जोगी"
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