जिला-कांकेर,छग
शीर्षक- ज्ञान
विधा-कविता (मुक्त छंद)
ज्ञान की रश्मियों ने
अज्ञानता की बेड़ियां
काट दी है ।
तमसो मा ज्योतिर्गमय
के मंत्र गूंजने लगे हैं
गांव -गांव में।
अंधविश्वास के बादल
छंटने लगे हैं अब
धीरे-धीरे ।
अब शिक्षा की नई जुगनुओं
से मेरे गांव जगमगाने
लगा है हौले- हौले।
सितारों अब शहरों में नहीं
गांव में दिखने लगे हैं
धीरे-धीरे।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
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